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ऐसे ईद की शुभकामना मै नहीं दे पाया!

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ईद से पहले वाली शाम को जैसे ही इन्टरनेट पर समय गुजारने बैठा तो देखा की ईद की मुबारकबाद देने वाले संदेशो की बाढ़ थी. मैंने भी सोचा की क्यों न मै भी ईद के लिए एक शुभकामना सन्देश लिख देता हूँ. पर जैसे ही मैंने लिखना शुरू किया मेरे अंतर्मन ने इतने सवाल दाग दिए की मै शुभ कामना सन्देश नहीं लिख पाया.
रमजान तथाकथित पवित्र महिना मुसलमानों का .. इस्लाम के पुजारियों का, इस्लाम जिसका तथाकथित अर्थ शांति होता है, इन शांति के पुजारियों के लिए ये महिना सबसे शांत होता है.. लेकिन इस बार शांति की गूंज कुछ ऐसी गूंजी की लोगो को विश्वास ही न रहा की निःशब्द शांति इतना तेज़ तेज़ से भी चिल्ला सकती है. लोगो को डरा सकती है. लोगो को मार सकती है, खून की नदिया बहा सकती है ,दंगे करा सकती है , लाखो लोगो को शरणार्थी शिविरों में रहने को मजबूर कर सकती है. शांति के पुजारियों के लिए ये कोई नयी बात नहीं थी पर शांति के पुजारियों का यह कृत्य शांति के महीने में होना नयी बात थी..
इस बार ईद की शुरुआत हमारे तथाकथित अल्पसंख्यक , अच्चर खच्चर और सच्चर कमेटी से मान्यता प्राप्त गरीब मजबूर मुसलमान बंधुओ ने बड़े शानदार अंदाज़ में की, शान्ति के महीने के पहले ही दिन घनघोर शांति का प्रदर्शन करते हुए बरेली में दंगे शुरू कर दिए, लोगो को घरो में रहने पर मजबूर किया गया शिवभक्त कावड़ियो पर हमले किये गए, उन्हें मारा पिटा गया..
उसके अगले दिन असाम में दंगे शुरू हुए , एक बार हमारे बोडो भाई यदि यहाँ के मुसलमानों से मार खाते तो भी समझ में आता की ठीक है ऐसा तो होता ही रहता है , पर ये क्या हुआ अपने देश के लोग अपने ही देश में विदेशियों से मार खा गए.. मार खा गए वो तो ठीक था पर .. बंगलादेशी शांति के पुजारियों सत्तर से अधिक लोगो को काट डाला , ४ लाख लोगो को घर बार छोडने पर विवश होना पड़ा. इतने लोगो को मारने में जब अपने दो चार भाई बंधू मर गए तो इन्होने जोर जोर से चिल्लाना शुरू किया की वहा पर तो हिंसक हिन्दुओ ने बेचारे मुस्लिम बिरदारानो को काट डाला, सन्देश पहुचने लगे लोगो तक वो भी किसकी सहायता से , अपने असली देश पकिस्तान की मदद से,[वो तो भला हो सरकार का जिसने देर से ही सही पर ईद से पहले ही ऐसे ७६ वेबसाइट को बंद कर दिया] और कुछ ही दिन बाद जुट गए सब शांति के पुजारी मुंबई में एक शांतिपूर्वक प्रदर्शन के लिए इन शांति के पुजारियों के लिए राष्ट्र पहले आता है या संप्रदाय इस प्रदर्शन से स्पष्ट हो गया की भारतीयों के मारे जाने का इन्हें कोई गम नहीं था इन्हें तो चिंता थी इनके मुस्लिम बिरदाराने की, उस शांति पूर्वक प्रदर्शन की अदभूद शांति में मीडिया वाले मारे गए , पोलिस वाले मारे गए और कल ही खबर आई की जिस महिला हवालदार को घेर कर इन शांति के पुजारियों ने शांति पाठ किया था वो गर्भवती थी और उसने आई सी यु में दम तोड़ दिया, इतने से ही इन शांति के पुजारियों का पेट नहीं भरा वो भारत के आन बान और शान के लिए जान लुटाने देने वाले शहीदों की याद में अनंत समय तक जलने वाले दीपक अमर जवान ज्योति को भी उठा ले गए और उस स्थान को तोड़ फोड़ दिया..
इसके बाद हिंसक हिन्दुओ का त्यौहार जन्माष्टमी आ गया . भला हिंसको का कोई त्यौहार इन शांति के पुजारियों को क्यों अच्छा लगाने लगता अल्पसंख्यक होने के नाते , दंगा करके लोगो को मार कर के शांति फ़ैलाने का पहला अधिकार तो इन्ही का है हमारे प्रधानमंत्री जी ने भी तो कह दिया की हर चीज पर पहला अधिकार इन बेचारे अत्यधिक भोले भाले सीधे साधे शांति के पुजारियों का है सो इन लोगो ने फिर से भारतीय पाकिस्तान बरेली में दंगा शुरू कर दिया.. सो सोनिया जी द्वारा नियुक्त सिंह साब के अनुसार ध्वनि प्रदुषण का भी पहला अधिकार तो इन्ही लोगो को है सो भगवान् श्री कृष्ण के लिए बजने वाले लाउड स्पीकर पर इन लोगो को आपत्ति होने लगी पर हिंसक हिन्दुओ ने नहीं मन सो हिंसको को सबक सिखाने के लिए इन्होने फिर दंगा शुरू किया. इनका दुर्भाग्य ये रहा की कोई मारा नहीं गया
तमाम लीग मैचो के के बाद अब बारी आई सेमी फाइनल की जिसे की इन शांति के पुजारियों ने अलविदा की नमाज के बाद खेलने का निर्णय लिया इस शान दार मुकाबले में इन लोगो का बेहद अच्छा प्रदर्शन रहा. लखनऊ में मेरे कमरे से २०० मीटर की दुरी पर टीले वाली मस्जिद से एक मैराथन दौड़ का आयोजन किया जिसकी चपेट में भगवान् महावीर की एक मूर्ति और गौतम बुद्ध जी की एक मूर्ती आ गयी सो वो टूट गयी कुछ माताए बहने जो की पार्क में आई थी उनके कपडे फट गए( जैसा की मेरे मित्र जयप्रकाश जी ने वर्णित किया था) १०-२० पत्रकार उस भीड़ में काम भर का कुटम्मस पा गए सो उनके भी देह की अकड़न भी थोड़ी छुट गयी पर उन एहशान फरामोश पत्रकारों ने धन्यवाद ज्ञापित करने के बदले इन बेचारो की प्रतिमा तोड़ते फोटो छाप दी, हम लोगो को लगा की मैच केवल यही पर हो रहा है लेकिन शाम होते होते खबर आई की इलाहाबाद में भी मैच के दौरान मात्र २०० वाहनों में आग लगाकर रख कर दिया. कानपुर में भी मार पीट शुरू हो गयी.
उत्तर पूर्व के भारतीयों को पुणे में मरना शुरू किये ,कर्णाटक आन्ध्र प्रदेश महाराष्ट्र में भारतीय बंधुओ को ही मारे जाने का सन्देश पहुचने लगे,हजारो य्त्तर पूर्व के बंधू अपना रोजगार छोड़कर घर भागने लगे और हमारी महान सरकार ने इन लोगो की सुरक्च्चा की जिम्मेवारी लेने के बजाय घर भेजने के लिए दो और स्पेसल ट्रेन चला दी.
हमारे बुद्धजीवी टीवी पर बैठकर गप्पे हांक रहे है की चन्द लोगो की भीड़ पुरे कौम का नाम बर्बाद कर रही है.. मै हिंदी का ज्यादा जानकार नहीं हु सो मुझे नहीं पता की चन्द लोग का क्या मतलब होता है .. मुंबई में शांति के पुजारियों की चन्द भीड़ में मात्र ५०००० लोग शामिल थे लखनऊ के सेमी फाइनल के मैच में मात्र १५००० लोग थे. इलाहाबाद में मात्र २०००० लोग थे जब आप लोगो को पता चले तो मुझे जरुर बताइयेगा..
लेकिन आखिरी बात जो मै कह कर इस लेख को ख़तम करना चाहूँगा वो ये है की हिन्दुओ की लाशो से सने इस रमजान के आखिर यानि ईद की मै बधाई नहीं दे पाउँगा… इतनी निर्लाज्ज़ता केवल सेक्युलरो में ही होती है राष्ट्रवादियो में नहीं की देश जब खून से नहा रहा हो तब हम ईद की शुभकामना दे.
खैर शांति के पुजारियों ने संदेशो के जरिये ये बता दिया है की वो फाइनल मैच ईद के बाद खेलने वाले है… आगे आगे देखिये होता है क्या….
डॉ. भूपेंद्र
२०/०८/२०१२

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22 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Alka के द्वारा
November 9, 2012

भूपेंद्र जी | आपका लेख अन्दर तक झकझोर गया | जो तुष्टिकरण की नीति हमारे यहाँ आजादीके बाद से चल रही है उसके दुष्परिणाम सबको पता है लेकिन कोई नेता बोटों के चक्कर में इसके विरुद्ध नहीं बोलता |

bharodiya के द्वारा
August 24, 2012

डो.साहब नमस्कार उनकी शांति वहुत बडी है, विश्वशान्ति । ये तभी संभव है जब पूरी दुनियामें सिर्फ ईस्लाम का ही राज हो । भारत जैसे छोटे टुकडे पर राष्ट्रियता जताना उन के लिए कोइ मतलब नही है, और हमें अपेक्षा भी नही रखनी चाहिए । क्रिश्चयनो का भी यही मत है । आपने देखा होगा की कोग्रेसमें क्रिश्चयनो की भरमार है । नाम भले हिन्दु के रहे हो हकिकत में क्रिश्चयन है । क्रिश्चयन बहुत बुध्धिमान प्रजा है । मुस्लिमो की मदद से हिन्दुओं खतम करना है, बादमें बुध्धिहीन मुस्लिमो को खतम करने में आसानी होगी ।

    drbhupendra के द्वारा
    August 25, 2012

    साजिश चाहे जो हो , मार खाने वाले तो हिन्दू संस्स्कृति वाले ही होंगे.. यदि मुट्ठी भर यहूदी एक होकर सबको धमका सकते है तो भला हम क्यों नहीं….???

nishamittal के द्वारा
August 22, 2012

आपका आक्रोश हर उस व्यक्ति का आक्रोश है जो तुष्टिकरण रूपी चश्मा उतार कर देखता है.

    drbhupendra के द्वारा
    August 22, 2012

    आदरणीया निशा जी मित्तल मेरे मंच पर आप पहली बार आई है आपका मै स्वागत करता हु… देश पन्थनिर्पेच्च से मुस्लिम्परस्त कब बन गया किसी को पता ही नहीं चल पाया

jlsingh के द्वारा
August 22, 2012

डॉ. भूपेंद्र जी, आपने वह क्लिप देखी होगी – के. सी. सुदर्शन चले नमाज पढने – पता नहीं इसमें सुदर्शन जी की क्या भावना थी ? पर उन्हें मस्जिद तक जाने नहीं दिया गया (सुरक्षा कारणों से)

    drbhupendra के द्वारा
    August 22, 2012

    श्री जवाहर लाल जी , पहले तो मै ये बात स्पष्ट कर दूँ.. की प. पु.सुदर्शन जी नमाज़ पढ़ने नहीं जा रहे थे वो ईद की बधाई देने ईदगाह जा रहे थे.. परन्तु जब उन्हें रोका गया तो उन्होंने कहा की मै तो ईदगाह जा रहा हु सो पुलिस वालो को लगा [या लगाया गया ] की वो नमाज पढ़ने जा रहे है.. दूसरी बात वो मुर्ख व्यक्ति नहीं है वो इस मुद्दे पर मुस्लिम धर्मगुरूओ को से बात करने में लगे है की चुनाव के दौरान आखिर में केवल दो शुरूआती अधिक मत पाने वाले व्यक्ति का अलग से चुनाव कराया जाय…से इससे बाधा फायदा ये होगा की चुनाव में दस से बीस प्रतिशत मुस्लिम वोट जिधर जाते है वो जीत जाता है वाला सिस्टम ख़तम हो जायेगा सो काफी हद तक तुस्टीकरण की राजनीति भी कम होगी … और इस मुद्दे पर सबसे प्रसिद्द शिया गुरु मौलाना कल्बे शादिक ने उनका समर्थन भी किया है

dineshaastik के द्वारा
August 22, 2012

आदरणीय डॉक्टर साहब, आपका आक्रोश जायज है, प्रचीन काल से आज तक हिन्दुओं ने  जो भी अत्याचार सहे हैं। उसके में उनका सहिष्णुता का सिद्धाँत रहा है। हमारी अहिंसक प्रवृति इसके हमारी बरवादी के लिये जिम्मदार है। यह कह कर मैं हिंसा का समर्थन नहीं कर रहा, बल्कि मेरे कहने का आशय है कि हिंसक के साथ हिंसक बनो और अहिंसक के  साथ अहिंसक। हम पर अल्पसंख्यकों के हावी होने का प्रमुख कारण है हमारा जाति में बँटा होना तथा हमारे अंदर उच्चजाति का दम्भ होना और अमानवीय ढ़ंग से स्वधर्म के लोंगो के साथ उपेक्षित व्यवहार करना। उन्हें हीन दृष्टि से देखना। सामान्य मानवीय  अधिकारों से व्यवहार रूप से वंचित करना। मुम्बई में 50 हजार लोगों का इस तरह  उत्पात मचा देने का प्रमुख कारण हमारी कमजोरी है। उनका साहस नहीं। यदि आज हम संगठित हों जाय तो भारत के क्या विश्व के अन्य सम्प्रदाय के लोगों की हमारे ओर नजर उठाकर देखने का साहस भी नहीं  होगा।  जिस ईद को शांति एवं प्रेम के लिये बनाने की शुरुआत हुई थी, आज उसने अन्य धर्म के  लोंगो से नफरत एवं समाज में अशांति फैलाने का रूप धारण कर लिया है। ये लोग ऐसा करके मुहम्मद साहब का अपमान करते हैं। संभवतः उन्हें इस बात का अहसास भी नहीं। सच कहूँ तो मुझे बचपन से ही जब अधिक समझ भी नहीं थी, हिन्दुओँ की होली और इस सम्प्रदाय के सभी त्यौंहारों में हिंसा नजर आती थी। ऐसा लगता था कि यह त्यौहार केवल हिंसा के लिये ही बनाये गये हैं। इस सम्प्रदाय में कुछ अच्छे लोग भी हैं, लेकिन वह संख्या में इतने कम हैं कि उनकी आवाज गुम हो जाती है। जो मुम्बई में हुआ, लखनऊ में हुआ तथा इलाहाबाद और बरेली में हुआ, वह सब सुनियोजित  एवं सरकार के कुछ लोंगो द्वारा संचालित किया गया लगता है। यह सब हुआ है सत्ता को पुनः  प्राप्ति का मार्ग स्थापति करने के लिये। क्योंकि ऐसा सरकार रवैया सिद्ध करता है। अन्य किसी  प्रमाण की आवश्यकता नहीं है। यदि हमने शीघ्र ही हिन्दुओं को संगठित करके जातिविहीन समाज की कल्पना नहीं की तो हमें  इनके और भी आतंक देखना एवं झेलना पढ़ेंगे। आपने अपने आक्रोश को जिस व्यंगात्मक शैली में प्रस्तुत किया है, वह निश्चित ही मेरे हृदय को आन्दोलित कर रहा है।

    drbhupendra के द्वारा
    August 22, 2012

    श्री दिनेश जी भाई ,जातिगत बंधन ढीले हो रहे है , अतः हमें निराश होने की कतई आवश्यकता नहीं है … अब जो बुराई १२०० साल में पनपी है उसे ख़तम होने में १२०न साल तो लगेंगे ही… पर यदि इस रफ़्तार को हम तेज़ कर ले तो भविष्य में होने वाले अतिरिक्त नुकशान से बच सकते है..

annurag sharma के द्वारा
August 21, 2012

बहुत खूब लिखा है श्रीमान समझदारों को इशारा काफी है

    drbhupendra के द्वारा
    August 21, 2012

    अनुराग जी समझदारो को आगे आकर राष्ट्रहित में काम भी करना होगा , केवल समझने से कुछ नहीं होगा

yogeshkumar के द्वारा
August 21, 2012

महाशय मैं आपकी तिलमिलाहट समझ सकता हूँ… ये बात बहुत से लोगों को समझ में नहीं आ रही है… सब अपने घर में मजे लेने में व्यस्त हैं और इस विश्वाश में जी रहे हैं कि उनके साथ कुछ नहीं होने वाला… मगर इतिहास के आकड़ें भयावह हैं…वास्तव में वर्तमान के आकड़ें भी बड़े गंभीर संकेत दे रहे हैं…जयचंद जो कि मुहम्मद गोरी कि बड़ी मदद करता था बाद में वो भी मुहम्मद गोरी के हाथों मारा गया….और उसके बाद क्या हुआ इतिहास गवाह है….जजिया कर देकर और अपनी बहु बेटियों को लुटा कर हिन्दुओं कि आत्मा मर गई है….. आज कांग्रेस असम में जिसे अपना बड़ा वोट बैंक समझ रही है वो ही आने वाले सालों में उसके लिए बड़ी चुनौती बनने वाला है… ये बात तरुण गोगोई को महसूस होने लगी है…. एक तरफ ये तथाकित शांति प्रिय लोग हैं जिन्होंने अपने असम ( घुसपैठ) और बर्मा (बौद्ध लड़कियों के साथ बलात्कार) के भाईयों की गलत हरकत से इस देश का जीना मुहाल कर रखा है.. वही दूसरी तरफ हिंदूओ जैसे बेवक़ूफ़ भी हैं जो पाकिस्तान में मारे जा रहे हिन्दुओं और उनकी लड़कियों के साथ बलात्कार और धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर साम्प्रदायिक सौहाद्र की बातें कर रहे हैं… वाह क्या बात!!!!!!!! जहाँ एक हिन्दू एक तरफ श्री कृष्ण के बड़े भक्त हैं वही हिन्दू गीता के मूल सन्देश को भूल गए…. वास्तव में मुझे लगता है ये सनातन धर्म जो गीता पे विश्वाश करने वाला था कई साल पहले ही ख़त्म हो गया मात्र हिंदुत्व के अवशेष मात्र रह गए हैं… अफ़सोस होता है…. ये देखकर …

    drbhupendra के द्वारा
    August 21, 2012

    योगेश जी आपकी बात से मै पूर्णतया सहमत हु …. सरदार पटेल ने एक बार ये कहा था की अल्पसंख्यको को सुरक्च्चा इस बात पर निर्भर कराती है की वो बहुसंख्यको में कितना विश्वाश पैदा कर सकते है पर नेहरू चाचा जैसे तथाकथित सेक्युलर चचो ने मामला उल्टा कर दिया अब तो बहुसंख्यको की सुरक्च्चा इस बात पर निर्भर रहती है की वो अल्पसंख्यको के कितने तलुए चाट सकते है..

drbhupendra के द्वारा
August 21, 2012

बड़े ख़ुशी के साथ मै अपने सुधि पाठको और ब्लॉगर मित्रो को बताना चाहता हु की इस लेख को मैंने आलोचना हेतु JNU के हिंदी विभाग के पूर्व विभागाद्य्च्च और कम्युनिस्ट विचारक जगदीश्वर चतुर्वेदी जी के पास भेजा था.. लेख चुकी राष्ट्रवादी भावना के साथ लिखा गया था सो मै लेख की बुराई सुनाने को तैयार बैठा था . पर उन्होंने निम्नलिखित ५ शब्दों में अपनी आलोचना भेजी.. ”बहुत अच्छा लिखा है आपने”

jlsingh के द्वारा
August 21, 2012

डॉ. भूपेंद्र जी, नमस्कार! आलेख के शीर्षक से मैं थोडा भ्रमित हो गया था इसलिए पूरा लेख पढ़ नहीं सका था. अभी पढ़ा हूँ और आपके तीखे व्यंग्य में राष्ट्रभक्ति के भाव देख सकता हूँ … पर हमारे हुक्मरान को क्या कहें … सोनिया जी कहती हैं सब ठीक-ठाक हैं मनमोहन सिंह की इतनी हिम्मत कैसे हो सकती है कि वे ‘मैडम’ के खिलाफ एक शब्द भी बोल दें. आखिर उनके संसदीय क्षेत्र का राज्य है तो क्या हुआ? पंजाब में भी सिक्खों पर भी आंच आयेगी तो पहले ‘मैडम’ से पूछेंगे फिर मुंह खोलेंगे! अंत में – अंधेर नगरी चौपट राजा के सिवा क्या कह सकता हूँ! दुःख इसी बात का है कि हम हिन्दू बहुसंख्यक होकर भी चुपचाप टी वी से चिपके रहने के आदी हो गए हैं ….

    drbhupendra के द्वारा
    August 21, 2012

    जवाहर लाल जी अब हम लोगो को अपने आलेख के माध्यम से लोगो को जगाना होगा और साथ ही जब लोकतंत्र का उत्सव यानि चुनाव आएगा तो परिवार समेत जाकर सही व्यक्ति को वोटिंग करनी पड़ेगी.. वोट हमारा मंत्र है , ये लोकतंत्र है

vasudev tripathi के द्वारा
August 20, 2012

जिस प्रकार से हिंसा का नग्न नृत्य इस बार रमजान के महीने में हुआ वह भी बंगलादेश व मलेशिया के कारण देश के विरुद्ध, वह न केवल चिंता उत्पन्न करता है वरन शंकाओं को भी जन्म देता है….. यह घातक है., अराष्ट्रीयता को स्वीकार नहीं किया जा सकता.!

    drbhupendra के द्वारा
    August 20, 2012

    यही तो समस्या है की जब देश का नागरिक होने के नाते इन बंगलादेशी घुशपैठियो का विरोध करना चाहिए तब ये लोग उन अपराधियों के लिए अपने देश के लोगो को मार काट रहे है..

Santlal Karun के द्वारा
August 20, 2012

भूपेंद्र जी, आप के व्यंग की धार बहुत तेज है, पर आतताइयों क्या, जैसे उनकी कुत्सित सोच युग-युगीन फौलादी हो और हमारे सारी धारें नाकाम साबित हो रहीं हों |अन्यथा कई बार क्षमा कर दिए जाने के बाद भी मुहम्मद गौरी का मन कहाँ बदला था !सिलसिला थम नहीं रहा है |ऐसे में आप जैसे लोगों के विचार ही हमें जीने का बल प्रदान करते हैं, नहीं तो देश के नियंता ओट के चक्कर में मैच की कैसी-कैसी टीमें और मैदान तैयार कर रहे हैं, कहने की आवश्यकता नहीं | तीखे व्यंग आलेख के लिए हार्दिक साधुवाद!

    drbhupendra के द्वारा
    August 20, 2012

    संतलाल जी हार्दिक धन्यवाद , यदि मुस्लिम एक जुट होकर वोट बैंक में तब्दील होकर जी हुजूरी करा सकते है तो हम लोग क्यों नहीं?? इस कलियुग में एक ही मन्त्र काम करता है संघे शक्ति कलियुगे

अनिल गुप्ता के द्वारा
August 20, 2012

बहुत बढ़िया

    drbhupendra के द्वारा
    August 20, 2012

    अनिल जी प्रतिक्रिया देने हेतु हार्दिक धन्यवाद … आशा है आगे भी ऐसे ही उत्साह वर्धन करते रहेंगे..


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